संजीव - सर, क्या मे अंदर आ सकता हूँ ?
सर - संजीव! बैठीये। आपकी क्लॉलिफीकेशन तो बहोत अच्छी है। Very Good.
प्रफुल्ल - सर, इसे नौकरी पर मत रखिए।
सर - क्यों?
प्रफुल्ल - ये अछुत है। अछुत।
सर - प्रफुल्ल! नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम के तेहेद भेदभाव करना कानून अपराध है और वैसे भी ये इन्सानियत के खिलाफ है। मिस्टर संजीव, नौकरी मुबारक।
संजीव - Thank you sir!
भेदभाव का युग बिता, मानवताने दिल जीता।